सही फैसला, पर गलत समय
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सही फैसला, पर गलत समय
चारा घोटाले का फैसला गलत समय पर आया है? यही चर्चा कुछ लोग कर रहे हैं। वे कहते हैं कि राजनीतिक वातावरण को ढाल बनाकर फैसले को अलग रंग दिया जाएगा, जो बिहार का दुर्भाग्य है।
पटना | चारा घोटाले का फैसला गलत समय पर आया है? यही चर्चा कुछ लोग कर रहे हैं। वे कहते हैं कि राजनीतिक वातावरण को ढाल बनाकर फैसले को अलग रंग दिया जाएगा, जो बिहार का दुर्भाग्य है।
अपने ट्वीट से लालू यादव क्या जाहिर करना चाहते हैं? जाहिर है, वे राजनीति प्रतिद्वंद्विता को सामने रखकर अपना बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान राजनीतिक वातावरण इस बात के लिए उनके अनुकूल बैठता है।

यह शंका क्या सच है? इस पर लोगों के अलग-अलग विचार हैं। वे कहते हैं कि देरी से आए एक सही फैसले को राजनीति से प्रेरित करार देने की भरपूर कोशिश हो रही है। इस पर वे लोग चुप हैं, जो टूजी पर बोल रहे हैं। यही बिहार का दुर्भाग्य है।

रांची की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को दोषी करार दिया है।

फैसले के बाद उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी है। वे अदालत के फैसले को अलग-अलग रंग में घोल रहे हैं। इसके लिए लालू के ट्विटर अकाउंट एक के बाद एक कई ट्वीट किए गए।

लालू प्रसाद के ट्वीटर एकांउट से पहला ट्वीट आया, ''संगठित हमले और पक्षपातपूर्ण प्रचार-तंत्र से सच को झूठ की तरह पेश किया जा सकता है या उसे संदिग्ध बनाया जा सकता है। लेकिन चाहे जो हो जाए भेदभाव और द्वेष का जो मलिन आवरण है, वो छंटेगा। आखिरकार सत्य को ही जीत मिलती है।''

उनका दूसरा ट्वीट है, ''धूर्त भाजपा अपनी जुमलेबाजी और कारगुज़ारियों को छुपाने और वोट प्राप्त करने के लिए विपक्षियों का पब्लिक पर्सेप्शन बिगाड़ने के लिए राजनीति में अनैतिक और द्वेष की भावना से ग्रस्त गंदा खेल खेलती है। झूठे जुमले बुनने वालों सच अपनी ज़िद पर खड़ा है। धर्मयुद्ध में लालू अकेला नहीं पूरा बिहार साथ खड़ा है।''

लालू ने अपने अगले ट्वीट में कहा, ''शक्तिशाली और ताक़तवर वर्ग हमेशा समाज को शासक और शासित वर्ग में बांटने में कामयाब रहता है। जब कोई निचले तबके से अन्यायपूर्ण सिस्टम को चुनौती देता है तो उसे जानबूझकर सज़ा दी जाती है।''

ऐसे ट्वीट से लालू यादव क्या जाहिर करना चाहते हैं? जाहिर है, वे राजनीति प्रतिद्वंद्विता को सामने रखकर अपना बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान राजनीतिक वातावरण इस बात के लिए उनके अनुकूल बैठता है। यही वजह है कि कुछ लोग यह मानते हैं कि एक सही फैसला गलत वक्त पर आया है। 


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