देश में हिंदू राष्ट्र का खतरा नहीं
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देश में हिंदू राष्ट्र का खतरा नहीं
जिन लोगों ने राजनीतिक स्वार्थ और वैचारिक-रणनीतिक जकड़न के कारण भाजपा को सत्ता में आने से रोकने की वास्तविक कोशिश नहीं की, वही आज शोर मचा रहे हैं कि संघ परिवार देश में हिंदू राष्ट्र-राज्य कायम करना चाहता है।
पटना | जिन लोगों ने राजनीतिक स्वार्थ और वैचारिक-रणनीतिक जकड़न के कारण भाजपा को सत्ता में आने से रोकने की वास्तविक कोशिश नहीं की, वही आज शोर मचा रहे हैं कि संघ परिवार देश में हिंदू राष्ट्र-राज्य कायम करना चाहता है।
जो नरेन्द्र मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट की इच्छा के बगैर न्यायाधीशों की बहाली तक नहीं कर पाती, वह हिंदू राष्ट्र कैसे स्थापित करेगी? उसकी ऐसी किसी मंशा के संकेत भी नहीं हैं। क्या ऐसे किसी दुःसाहसी कदम में सरकार को सेना का साथ मिलेगा? सेना धर्मनिरपेक्ष और अराजनीतिक है।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह शोर तेज हो गया है। कुछ लोगों को आपातकाल की पुनरावृत्ति की भी आशंका है। शायद उनके इस शोर में भी कोई स्वार्थ छिपा हुआ है, क्योंकि अब भी वे ऐसा कोई ठोस काम नहीं कर रहे हैं, जिनसे भाजपा कमजोर हो। सिर्फ वोट बैंक और घिसे-पिटे नारों से ही काम चला लेना चाहते हैं।

धर्मनिरपेक्ष देश को हिंदू राष्ट्र-राज्य में परिणत करने में आने वाली बाधाओं पर पहले चर्चा कर ली जाए। भारतीय संविधान के मूल ढांचे को बदले बिना यहां किसी तरह का धार्मिक शासन कायम नहीं किया जा सकता।

क्या यह संभव है? 24 अप्रैल 1973 को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस.एम.सिकरी की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय संविधान पीठ ने ऐतिहासिक जजमेंट दिया था। केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य मुकदमे में पीठ ने कहा था कि ‘भारतीय संविधान के अंतर्गत संसद ‘सुप्रीम’ नहीं है। संसद संविधान के बुनियादी ढांचे और विशेषताओं को बदल नहीं सकती।’

जो नरेन्द्र मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट की इच्छा के बगैर न्यायाधीशों की बहाली तक नहीं कर पाती, वह हिंदू राष्ट्र कैसे स्थापित करेगी? उसकी ऐसी किसी मंशा के संकेत भी नहीं हैं। क्या ऐसे किसी दुःसाहसी कदम में सरकार को सेना का साथ मिलेगा? सेना धर्मनिरपेक्ष और अराजनीतिक है।

दरअसल ऐसे शोर मचाने वाले कुछ लोग तो अपने वैचारिक खोखलेपन और रणनीतिक जकड़ता को बरकरार रखना चाहते हैं ताकि उनके विचार समय पार साबित न होने पाए। इस श्रेणी के राजनीतिक कर्मी हिंदू राष्ट्र राज्य का शोर मचा कर वोट बैंक को मजबूत भी रखना चाहते हैं।

हालांकि वे भूल रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में कुछ मुस्लिम महिलाओं ने भी भाजपा को वोट दिए, क्योंकि भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह तीन तलाक के खिलाफ है। उधर शाहबानो केस में कांग्रेस सरकार ने क्या किया था?

(जाने माने पत्रकार सुरेंद्र किशोर का यह संपादित आलेख उनके ब्लॉग से साभार है।)


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