कई और राज्य भी आएंगे 'पायलिन' की चपेट में
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कई और राज्य भी आएंगे 'पायलिन' की चपेट में
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कई और राज्य भी आएंगे 'पायलिन' की चपेट में
बंगाल की खाड़ी का अब तक का सबसे बड़ा चक्रवाती तूफान 'पायलिन' समुद्र के ऊपर कई घंटों तक स्थिर रहने के बाद तेज गति से ओडिशा के तटीय इलाकों से आगे की तरफ बढ़ रहा है।
नयी दिल्ली | बंगाल की खाड़ी का अब तक का सबसे बड़ा चक्रवाती तूफान 'पायलिन' समुद्र के ऊपर कई घंटों तक स्थिर रहने के बाद तेज गति से ओडिशा के तटीय इलाकों से आगे की तरफ बढ़ रहा है।
मौसम विभाग का कहना है कि तूफ़ान का सबसे ज़्यादा असर छह घंटे तक रहेगा, उसके बाद उसकी तीव्रता कम होने लगेगी। शुक्रवार से ही यहां तेज बारिश और तूफान जारी है। लोग अपने घर-ठिकानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तरफ कूच रहे हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात का असर केवल उड़ीसा और आंध्र प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहेगा। अगले 24 घंटे के दौरान समूचे ओडीशा उसके बाद झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्यप्रदेश समेत सूमचे पूर्वी भारत में भी अत्याधिक भारी बारिश की संभावना है।

चक्रवात के ओडिशा और आंध्रप्रदेश के तट के करीब पहुचने पर हवा लगभग 220-235 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही है और लहरें लगभग साढ़े तीन मीटर तक ऊंची उठ रही है जो जमीन पर 300-600 मीटर तक भीतर प्रवेश कर गयी हैं। पायलिन से भारत में लगभग 1.2 करोड़ लोगों के प्रभावित होने की संभावना है। ओडिशा में कथित तौर पर 7.2 लाख से अधिक लोगों को खाली करा लिया गया है, वहीं आंध्र प्रदेश में लगभग एक लाख लोगों को हटाया गया है।

मौसम विभाग का कहना है कि 'पायलिन' से सबसे ज्यादा नुकसान ओडिशा के गंजम जिले में होगा। सबसे ज़्यादा एक लाख चालीस हज़ार लोगों को गंजाम ज़िले से हटाया गया है और पुरी से 80,000 लोगों को निकाल लिया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि तूफ़ान का सबसे ज़्यादा असर छह घंटे तक रहेगा, उसके बाद उसकी तीव्रता कम होने लगेगी। शुक्रवार से ही यहां तेज बारिश और तूफान जारी है। लोग अपने घर-ठिकानों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की तरफ कूच रहे हैं।

ओडीशा के गोपालपुर तट से पंद्रह किलोमीटर दूर मौजूद बीबीसी संवादादाता सलमान रावी के मुताबिक आसपास की इमारतों के शीशे टूटने की आवाज़ें आ रहीं हैं। जैसे-जैसे वक़्त बीत रहा है तूफ़ान की रफ़्तार बढ़ती जा रही है। यहां समुद्री लहरें ऊपर उठने लगी हैं।

ओडिशा में राहत कार्य राज्य के विशेष राहत आयुक्त पीके महापात्रा के निर्देशन में किया जा रहा है। महापात्रा के मुताबिक ओडिशा के गंजाम, पुरी, खुर्दा और जगतसिंहपुर जिलों के सबसे ज़्यादा प्रभावित होने की संभावना है।

ज्ञात हो कि साल 1999 में ओडिशा में ऐसे ही एक समुद्री तूफ़ान ने भीषण तबाही मचाई थी और इससे करीब दस हज़ार से अधिक लोगों की मौत हुई थी। आज लगभग 14 साल बाद फिर से लगभग उसी तीव्रता का एक भीषण तूफ़ान पायलिन ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तट से टकरा रहा है। क्या इस बार नुकसान को कम किया जा सकेगा? ओडिशा सरकार ने वायदा किया है कि उनकी कोशिश है कि इस बार तूफ़ान के कारण एक भी व्यक्ति की जान न जाए।


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