उस हमले का दर्द अब भी है
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उस हमले का दर्द अब भी है
आकाश साफ था। दिल्ली की गुनगुनी धूप में लोग इंडिया गेट पर हर दिन की तरह इकट्ठा थे। वहीं संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। 11.02 बजे लोकसभा स्थगित हो गई थी। तभी एक सफेद एम्बैसडर कार उपराष्ट्रपति कृष्ण कांत की कार से आकर टकराई। फिर अंधाधुंध फारयरिंग शुरू हो गई।
नई दिल्ली | आकाश साफ था। दिल्ली की गुनगुनी धूप में लोग इंडिया गेट पर हर दिन की तरह इकट्ठा थे। वहीं संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। 11.02 बजे लोकसभा स्थगित हो गई थी। तभी एक सफेद एम्बैसडर कार उपराष्ट्रपति कृष्ण कांत की कार से आकर टकराई। फिर अंधाधुंध फारयरिंग शुरू हो गई।
संसद परिसर में पहली गोली की आवाज से चारो तरफ सनसनी फैल गई थी। उपराष्ट्रपति की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों और आतंकवादियों के बीच गोलियां चल रही थीं। इसी दौरान मातबर सिंह ने अपनी जान पर खेलकर गेट नंबर 11 को बंद किया। यह देख आतंकवादियों ने मातबर सिंह पर गोलियां बरसा दीं। इसके बावजूद सिंह ने अपने वॉकी-टॉकी पर अलर्ट जारी कर दिया, जिसके बाद संसद के सभी दरवाजों को तत्काल बंद कर दिया गया।

तब संसद परिसर के अलग-अलग हिस्सों में काफी लोग मौजूद थे। गोली की आवाज सुनते ही वे तरह-तरह के कयास लगाने लगे। वहीं गोली की आवाज़ सुनते ही कैमरामैन से लेकर संसद सुरक्षा में लगी वॉच एंड वॉर्ड टीम के सदस्य आवाज की दिशा की ओर भागे।

तब इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता लगभग व्यस्क हो चुकी थी। संसद पर हमले के दौरान कई पत्रकार परिसर के बाहर लाइव रिपोर्टिंग करने लगे। इससे तत्काल पूरी दुनिया में खबर फैल गई। यह भारतीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए शर्म की बात थी।

हालांकि, लोकसभा स्थगित होने के बाद पीएम अटल बिहारी वाजपेयी और सोनिया गांधी संसद से निकल चुके थे, लेकिन देश के उपराष्ट्रपति कृष्ण कांत निकलने वाले थे। गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी और प्रमोद महाजन समेत कई दिग्गज नेता संसद में मौजूद थे। वे सभी घटना से चकित थे। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था।

संसद परिसर में पहली गोली की आवाज से चारो तरफ सनसनी फैल गई थी। उपराष्ट्रपति की सुरक्षा में लगे सुरक्षाकर्मियों और आतंकवादियों के बीच गोलियां चल रही थीं। इसी दौरान मातबर सिंह ने अपनी जान पर खेलकर गेट नंबर 11 को बंद किया।

यह देख आतंकवादियों ने मातबर सिंह पर गोलियां बरसा दीं। इसके बावजूद सिंह ने अपने वॉकी-टॉकी पर अलर्ट जारी कर दिया, जिसके बाद संसद के सभी दरवाजों को तत्काल बंद कर दिया गया। इसके बाद आतंकवादियों ने संसद में घुसने के लिए गेट नंबर-1 का रुख किया। वहां सुरक्षाकर्मियों ने उनका सामना किया। वहीं सुरक्षाबलों ने एक आतंकवादी को मार गिराया।

उस वक्त मौके पर मौजूद टीवी पत्रकार सुमित अवस्थी ने बीबीसी को बताया, " उस वक्त मेरी सबसे बड़ी चिंता यही थी कि प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी सुरक्षित हैं या नहीं। क्योंकि मैं गृह मंत्री आडवाणी को सकुशल हालत में देख चुका था। मुझे बाद में पता चला कि हमले की जवाबी कार्रवाई आडवाणी के निरीक्षण में हो रही थी।"

आतंकवादियों ने पत्रकारों पर भी गोलियां चलानी शुरू कर दी। इसी दौरान एक गोली न्यूज एजेंसी एएनआई के कैमरा पर्सन को लगी। उसे घायल हालत में एम्स में भर्ती कराया गया, जिसके कुछ समय बाद उनकी मौत हो गई।

इसके बाद चारों आतंकवादी गेट नंबर नौ की तरफ गए। इस दौरान तीन आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। पांचवां आतंकवादी गेट नंबर पांच की ओर भाग कर संसद में घुसने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षाबलों ने उसे भी मार दिया।

संसद पर आतंकी हमले के बाद सुरक्षाकर्मियों और आतंकवादियों के बीच शाम चार बजे तक मुठभेड़ हुई। शाम चार से पांच बजे के आस पास सुरक्षाबल भारी संख्या में संसद पहुंचे। पूरे क्षेत्र की छानबीन की।

इस हमले में दिल्ली पुलिस के पांच सुरक्षाकर्मी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक महिला सुरक्षाकर्मी, राज्य सभा सचिवालय के दो कर्मचारी और एक माली की मौत हुई।

इस घटना के बाबत चार आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। बाद में दिल्ली की पोटा अदालत ने 16 दिसंबर 2002 को चार लोगों, मोहम्मद अफजल, शौकत हुसैन, अफसान और प्रोफेसर सैयद अब्दुल रहमान गिलानी को दोषी करार दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर सैयद अब्दुल रहमान गिलानी और नवजोत संधू उर्फ अफसां गुरु को बरी कर दिया था, लेकिन मोहम्मद अफजल की मौत की सजा बरकरार रखी थी। शौकत हुसैन की मौत की सजा को घटाकर 10 साल की सजा कर दिया था। अफजल गुरु को दिल्ली की तिहाड़ जेल में 9फरवरी, 2013 सुबह आठ बजे फांसी दी गई थी। 


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