मड़ियाॅव की 'रेड ब्रिगेड'
रेड ब्रिगेड,उषा विश्वकर्मा,सामूहिक बलात्कार
मड़ियाॅव की 'रेड ब्रिगेड'
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मड़ियाॅव की 'रेड ब्रिगेड'
दिसंबर 2012 में नई दिल्ली में 23 वर्षीया छात्रा के साथ हुए निर्मम सामूहिक बलात्कार के बाद इनकी संख्या कई गुना बढ़ गई है।
लखनऊ | लखनऊ में यौन हिंसा की शिकार 11 से 25 साल की 15 युवतियों ने 25 वर्षीय शिक्षक उषा विश्वकर्मा के नेतृत्व में 'रेड ब्रिगेड' का गठन किया। ये लड़कियां यौन हिंसा से पीड़ित दूसरी लड़कियों की मदद करती हैं।
जब से रेड ब्रिगेड बना है काफी हालात बदले हैं। वही लड़कियां जो अपने दर्द से उबर नहीं पा रही थीं अब दूसरी लड़कियों को हौसला देती हैं। ब्रिगेड की सदस्य केवल लड़ ही नहीं रही हैं, वे एक कैरियर बनाने के लिए अपनी शिक्षा भी ले रही हैं। --उषा विश्वकर्मा, संयोजक एवं संस्थापक सदस्य

रेड ब्रिगेड की ज्यादातर युवा महिलाएं लखनऊ शहर की एक गन्दी बस्ती, मड़ियाॅव की रहने वाली हैं। ये युवतियां लाल समीज और काला सलवार पहनती हैं। काली सलवार, काला दुपट्टा और लाल कुर्ते में जब यह लड़कियां गुजरती हैं तो उनसे बोलने की हिम्मत कोई नहीं करता। नुक्कड़ पर खड़ा लड़कों का झुंड भी इस टोली को देखकर एक बारगी समझ जाता है कि आज किसी की खैर नहीं। ये लड़कियां यौन शोषण करने वाले पुरुष को सार्वजनिक तौर पर अपमानित करती हैं और इस प्रकार के बर्ताव के बारे में अपनी आवाज़ बुलंद कर औरतों को जागरूक बनाती हैं।

रेड ब्रिगेड की चपेट में आने वाले पुरुषों को पहली बार चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है। उसे अपनी हरकते बंद करने का आदेश दिया जाता है। अगर वह अपनी हरकत बंद नहीं करता है तो परिणाम स्वरूप उसे सार्वजनिक अपमान या हिंसा से दंडित किया जा सकता है। कभी-कभी रेड ब्रिगेड पुलिस से हस्तक्षेप करने का अनुरोध भी करता है। फिर पुलिस उस मामले को खुद अपने हाथों में ले लेती है। प्रशासन ने अभी तक रेड ब्रिगेड पर कानून भंग करने के कोई आरोप नहीं लगाए हैं, हां इनके इस तरह कानून को अपने हाथों में लेने की आलोचना ज़रूर की है।

रेड ब्रिगेड की संयोजक एवं संस्थापक सदस्य उषा विश्वकर्मा को खुद इस तरह की समस्याओं से गुजरने का अनुभव है। ऊषा रानी ने बताया कि इसके पीछे भी एक दर्द भरी कहानी ही है। मैं यहां बच्चों को पढ़ाया करती थी। यह 2007 की बात है जब उन्हीं बच्चों में से एक बच्ची का रेप उसी के चाचा ने किया। मैं बहुत दौड़ी , लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। इस घटना के ठीक 6 महीने बाद मेरे साथ ही बच्चों को पढ़ाने वाले लड़के ने मुझपर रेप करने की कोशिश की। उस घटना ने मुझे तोड़ दिया।

दरअसल जब वे मात्र 18 साल की थीं तब एक साथी शिक्षक ने उनके साथ बलात्कार करने की कोशिश की। स्कूल में किसी ने भी उसकी गलती को गंभीरता से नहीं लिया और उषा को सलाह दी कि इस बात को भूल जाओ। इस हादसे ने उषा को काफी आघात पहुँचाया।

इसके बाद उन्होंने साल 2010 में युवतियों को अपनी रक्षा खुद करने के लिए युवतियों के लिए एक ब्रिगेड बनाने का निश्चय किया। साथ ही निश्चय किया कि वो मात्र शिकायत नहीं करेंगे बल्कि अपनी रक्षा खुद करेंगे। ब्रिगेड की सभी युवतियों ने लाल समीज और काला सलवार ख़रीदा और पहनना शुरू कर दिया। विश्वकर्मा कहती हैं," हमने जो लाल रंग चुना है वो खतरे का निशान है और काला प्रतिवाद (विरोध) का।"

जब उनसे पूछा गया कि उनके अन्दर इतना साहस कहाँ से आता है तो उषा कहती हैं, “जब आप पीड़ित हो और आप जब शिकार बनते हैं तो आपको अपने आप से साहस मिलता है।”

ऊषा कहती हैं कि "इस ग्रुप के बनने के पीछे लड़कियों का दर्द था जो अब एक बदलाव का रूप ले चुका है। जब से रेड ब्रिगेड बना है काफी हालात बदले हैं। वही लड़कियां जो अपने दर्द से उबर नहीं पा रही थीं अब दूसरी लड़कियों को हौसला देती हैं। ब्रिगेड की सदस्य केवल लड़ ही नहीं रही हैं, वे एक कैरियर बनाने के लिए अपनी शिक्षा भी ले रही हैं।"

लाल ब्रिगेड की ज्यादातर लड़कियां अतीत में किसी न किसी तरह के शोषण का शिकार भी हुई हैं। अब वे मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण लेती हैं और विरोध प्रदर्शन में भाग लेती हैं। दिसंबर 2012 में नई दिल्ली में 23 वर्षीया छात्रा के साथ हुए निर्मम सामूहिक बलात्कार के बाद इनकी संख्या कई गुना बढ़ गई है।


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