आइस बकेट का भारतीय जवाब राइस बकेट
चावल,राइस बकेट चैलेंज
आइस बकेट का भारतीय जवाब राइस बकेट
   शुक्रवार | जुलाई २०, २०१८ तक के समाचार
आइस बकेट का भारतीय जवाब राइस बकेट
चावल पका हो या कच्चा यह भी कोई मायने नहीं रखता है। आप पुलाव बिरयानी कुछ भी दे सकते हैं।
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हैदराबाद | दुनियाभर में 'आइस बकेट चैलेंज' की धूम के बीच इसके भारतीय संस्करण में पानी की जगह चावल आ गया है। इसके भारतीय प्रारूप का नाम 'राइस बकेट चैलेंज' है।
आप वॉशिंगटन डीसी में रह रहे हों या तंजानिया के किसी गांव में, आप ज़रूरतमंदों को चावल दे सकते हैं।-- चावल अनुसंधान केंद्र, हैदराबाद

'आइस बकेट' को यह चुनौती हैदराबाद स्थित चावल अनुसंधान केंद्र में काम करने वाली 38 वर्षीय मंजुलता कलानिधि ने दी है। इसका दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें बाल्टी की जगह मुट्ठी भर चावल या थाली भर चावल किसी ज़रूरमंद को दिया जाता है। मंजुलता ने अपने दोस्तों को फेसबुक पर चैलेंज देते हुए कहा कि वे एक बकेट चावल खरीदकर या पकाकर अपने इलाके में गरीबों को खिलाएं। चावल पका हो या कच्चा यह भी कोई मायने नहीं रखता है। आप पुलाव बिरयानी कुछ भी दे सकते हैं।

कलानिधि ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर एक ज़रूरतमंद व्यक्ति को चावल का पैकेट देते हुए अपनी तस्वीर पोस्ट की है। उनकी यह तस्वीर वायरल हो चुकी है। लगभग 50,000 से अधिक लोगों ने इसे पसंद किया है और सैकड़ों लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस मुहिम में नज़दीकी अस्पताल में चावल या उसके बदले में 100 रुपये दिये जा रहे हैं।  इस राइस बकेट चैलेंज की चर्चा दुनिया भर में हो रही है।

मंजू लता अपने फेसबुक पेज पर लिखती हैं, "यह चैलेंज हमारे यहां के मुद्दे से जुड़ा है, देसी है और प्रैक्टिकल भी आइस बकेट चैलेंज में पानी बर्बाद करने की जगह, पानी बचाएं और गरीबों को खिलाएं"

कलानिधि ने बीबीसी हिंदी को बताया, "यह पश्चिमी देशों से शुरू हुए 'आइस बकेट चैलेंज' को भारत का जवाब है। बर्फीले ठंडे पानी को पहले अपने ऊपर डालना और फिर उसका वीडियो बनाकर इंटरनेट पर डालना मुझे बड़ा अजीब लगा। मुझे लगता है कि यह इतना अजीब है कि हम भारतीय इससे जुड़ नहीं पाएंगे।"

कलानिधि द्वारा निजी स्तर पर शुरू की गई इस मुहिम को उनके संस्था का समर्थन भी हासिल है। संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इसकी चर्चा की गई है। इसमें कहा गया है, "आप वॉशिंगटन डीसी में रह रहे हों या तंजानिया के किसी गांव में, आप ज़रूरतमंदों को चावल दे सकते हैं।"

अपनी भावी योजना के बारे में कलानिधि ने बताया, "बहुत सारे दोस्त और गैर सरकारी संगठन मेरे संपर्क में आए हैं और उन्होंने सलाह दी है कि इसे ऑफ़लाइन मुहिम बनाया जाए। इसे मिशन इंडिया प्रोग्राम के रूप में तब्दील किया जाए।"

परंपरा का हिस्सा
लेकिन इस मुहिम में चावल ही क्यों? इस पर कलानिधि कहती हैं, "भारत निश्चित तौर पर चावल उत्पादक और उपभोक्ता देश है। चावल दान में देना हमारी परंपरा का हिस्सा है। भले ही हम हिंदू, मुस्लिम या ईसाई हो।"

हॉलिवुड की मशहूर सिलेब्रिटी माइली साइरस ने सबसे पहले राइस बकेट चैलेंज का नाम लिया था, जब उन्होंने बर्फ से भरी बाल्टी सर पर उड़ेलने के चैलेंज को पूरा करने के बजाय चावल से भरी बाल्टी को अपने शरीर पर उड़ेला था।


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