प्रेम को छिपाना अपराध है: मैत्रेयी पुष्पा
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प्रेम को छिपाना अपराध है: मैत्रेयी पुष्पा
   रविवार | नवंबर १९, २०१७ तक के समाचार
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प्रेम को छिपाना अपराध है: मैत्रेयी पुष्पा
पुरुष प्रेम कहानी नहीं लिख सकते, क्योंकि स्त्री ही प्रेम के कोमल भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकती है। सुप्रसिद्ध साहित्यकार व हिंदी अकादमी की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा ने यह बात कही।
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पुरुष प्रेम कहानी नहीं लिख सकते, क्योंकि स्त्री ही प्रेम के कोमल भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकती है। सुप्रसिद्ध साहित्यकार व हिंदी अकादमी की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा ने यह बात कही।
नई दि्ल्ली  | पुरुष प्रेम कहानी नहीं लिख सकते, क्योंकि स्त्री ही प्रेम के कोमल भावनाओं को बेहतर तरीके से समझ सकती है। सुप्रसिद्ध साहित्यकार व हिंदी अकादमी की उपाध्यक्ष मैत्रेयी पुष्पा ने यह बात कही।
एक पुरुष के मुकाबले स्त्री ज्यादा अच्छी प्रेम कहानी लिखती है। स्त्री ही प्रेम के विविध रूपों को महसूस करती है, इसलिए वह सुंदर प्रेम कहानियां लिख सकती है।- मैत्रेयी पुष्पा

डॉ. कायनात काजी के पहले कहानी संग्रह बोगनवेलिया के लोकार्पण समारोह में मैत्रेयी पुष्पा ने कहा, “प्रेम को नकारना और प्रेम को छिपाना अपराध है। हम प्रेम को छिपाकर उसे अपराध की संज्ञा दे देते हैं, जो कि उचित नहीं है। अगर प्रेम है तो उसे खुलेआम स्वीकार करना चाहिए।”  

स्मरण रहे कि चार जनवरी को कलमकार फाउंडेशन की तरफ से नई दिल्ली के साहित्य अकादमी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मैत्रेयी पुष्पा ने कहानी संग्रह ‘बोगनवेलिया’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि आजकल अच्छी कहानियां पढ़ने को नहीं मिल रही हैं। कायनात की कहानियां इस कमी को पूरा कर रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि पुस्तक खोलने के बाद वे लगातार एक के बाद एक सारी कहानियां पढ़ती चली गईं। इन कहानियों में जीवन की मामूली बातों को सुनाने का तरीका प्रभावित करता है।

चर्चा को गंभीर बहस की तरफ मोड़ते हुए मैत्रेयी पुष्पा ने प्रेम के कोमल भाव की तरफ श्रोताओं का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि एक पुरुष के मुकाबले स्त्री ज्यादा अच्छी प्रेम कहानी लिखती है। स्त्री ही प्रेम के विविध रूपों को महसूस करती है, इसलिए वह सुंदर प्रेम कहानियां लिख सकती है।

उन्होंने देह और प्रेम के अंतर-संबंधों पर भी प्रकाश डाला। मैत्रेयी पुष्पा ने कहा कि लोगों को लगता है प्रेम के लिए देह ज़रूरी है, जबकि प्रेम अलग है और सेक्स अलग। प्रेम का सेक्स से संबंध नहीं है। स्त्री की आज़ादी सही मायने में तब होगी, जब उसे प्रेम करने की स्वतंत्रता होगी। वह जिससे प्रेम करे, उसे बिना संकोच पति से मिलवा सके। समाज भी यह स्वीकार सके कि पति अलग होता है और प्रेमी अलग। इतनी ताकत तब मिलेगी, जब ये समझ सकेंगे की प्रेम की मनाही कहीं नहीं है और देह प्रेम नहीं है।

इस अवसर पर वरिष्ठ कवि और भारतीय ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत कर रहे लीलाधर मंडलोई ने कहा, “मैं कविता के पाठक की तरह किताब पढ़ता हूं और अनकहे को ढूंढ़ता हूं।”

वे बोले, “संग्रह की पहली ही कहानी “बोगनवेलिया” इतनी बढ़िया लगी कि यह शेर याद आ गया- ‘था इतना सख्त जान कि तलवार बेअसर, था इतना नर्म दिल कि गुल से कट गया।।’ उन्होंने प्रेम के शेड्स की बात करते हुए कहा कि प्रेम और करुणा दुनिया में दो ही तत्व हैं।

मंडलोई ने कहा कि “बोगनवेलिया” की कहानियां डॉ. कायनात के फोटोग्राफर गुण को शेयर करता है। उन्होंने कहा कि स्त्री अगर प्रेम कहानी लिखे तो पुरुष उसे नहीं पढ़ सकता। लोगों को अगर प्रेम समझ आ जाये तो समाज में नफरत ही नहीं रहेगी।

इस अवसर पर “पाखी” के संपादक प्रेम भारद्वाज ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि प्रेम और सियासत पर लिखना कठिन कार्य है। “बोगनवेलिया” की कहानियां अलग तरह की हैं। इसमें बहुत विविधता है। इसे पढ़ कर कई बार लगने लगता है कि जैसे दो अलग लोगों ने कहानियां लिखी हों।

वरिष्ठ टीवी पत्रकार एवं समीक्षक अनंत विजय ने डॉ कायनात काजी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इनकी भाषा में रंग हैं। उत्तर आधुनिक बिम्ब है। कहानी संग्रह के तौर पर “बोगनवेलिया” कायनात की पहली पुस्तक है। हालांकि, “कृष्णा सोबती का साहित्य और समाज” नामक पुस्तक इनकी पहले प्रकाशित हो चुकी है।

डॉ. कायनात काजी ब्लॉगर हैं। ‘राहगीरी’ नाम से हिंदी का पहला ट्रैवेल फोटोग्राफी ब्लॉग चलाती हैं। 


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