मोदी का सफरनामा
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मोदी का सफरनामा
   बुधवार | दिसंबर १३, २०१७ तक के समाचार
मोदी का सफरनामा
नरेंद्र मोदी की जीवन यात्रा एक ऐसे व्यक्ति की असाधारण कथा है, जहां विरोधियों का विरोध भी मंजिल की तरफ बढ़ाता गया।
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नई दिल्ली | नरेंद्र मोदी ने चुनाव अभियान के दौरान कहा था,‘‘मुझे विश्वास है कि ईश्वर ने मुझे चुना है।’’ चुनावी नतीजे ने साफ कर दिया है कि जनता भी मानती है कि वही देश को झंझावातों से निकाल जाएंगे।
विरोध से बेपरवाह मोदी ने आम चुनाव के लिए चतुराई से एक ऐसा अथक ओैर हाई टैक प्रचार अभियान चलाया जैसा पहले कभी नहीं देखा गया।

बहरहाल, अपने जबर्दस्त चुनाव प्रचार के दौरान 63 वर्षीय मोदी ने खुद अपनी आंखों से कांग्रेस विरोध और उसके साथ ही राजग के जोरदार समर्थन की आंधी को लगातार महसूस किया।  

प्रचार अभियान के दौरान नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि वे टीम वर्क में विश्वास रखते हैं। जो लोग उनके साथ काम कर चुके हैं, वे जानते हैं कि वे एक मजबूत इच्छाशक्ति वाले निर्णय लेने वाले व्यक्ति हैं।  

मोदी ने अपने विरोधियों पर आरोप लगाया था कि वे उनपर हमले करने के लिए बहुत ही अस्पष्ट, वैयक्तिक और फिजूल आरोप लगाते हैं। उन्हें तानाशाह, विभाजनकारी ओैर बेहद कट्टर बताते हैं।  

इसपर मोदी का कहना था कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, भाई भतीजावाद अथवा अक्षम होने जैसा कोई भी गंभीर आरोप नहीं है। 

भाजपा ने मोदी के नेतृत्व में जबर्दस्त बहुमत प्राप्त कर ऐसे कारनामे को अंजाम दिया है, जैसा 1984 में राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने किया था। भारतीय जनता पार्टी ने अपना अब तक का सबसे बढ़िया प्रदर्शन किया।

देश की राजनीति में पिछले तीन दशक से मौजूद रही पार्टी अभी तक कभी इतनी शानदार जीत दर्ज नहीं कर पाई थी।  सहयोगी दल या उनके विरोधी नरेंद्र मोदी को समाज बांटने वाला, ध्रुवीकरण करने वाला और कट्टर हिंदुत्ववादी और गुजरात के मुसलमान विरोधी दंगे के लिए आरोपी जैसे संबोधनों से संबोधित करते हैं। 

इसके बावजूद मोदी के समर्थक उन्हें ‘एक ऐसा मजबूत नेता’’मानते हैं जो विपक्षियों की राजनीतिक रणनीति को भेद देगा। गुजरात के मुख्यमंत्री के बतौर गत 12 साल के कार्यकाल के दौरान मोदी ने अपनी छवि एक ऐसे नेता की गढ़ी है, जिसके पास पिछले कुछ वर्षों से ‘नीतिगत जड़ता’ से जूझ रहे देश का शासन चलाने की वैकल्पिक दृष्टि है। 

पने प्रचार अभियान के दौरान विकास को अपना मुख्य मुद्दा बनाते हुए मोदी ने देश की युवा शक्ति, मध्यवर्ग और ग्रामीण लोगों को ‘बदलाव की बयार ’लाने का भरोसा दिलाने के लिए संपर्क साधने की पुरजोर कोशिश की।

चुनाव परिणाम से साफ हो गया है कि उनकी कोशिश रंग लाई, हालांकि बीच बीच में कभी कभार भगवा ताकतों के कुछ पसंदीदा विषयों को उठाकर मतदाताओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिशें भी उनके अभियान में दिखीं।  

एक कुशल रणनीतिकार मोदी रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने से लेकर लोकप्रिय नेता बनने तक का सफर बड़ी कुशलता से पूरा किया है।  संघ परिवार की ‘हिंदुत्व की प्रयोगशाला’ माने जाने वाले राज्य में मोदी ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपनी छवि एक कट्टरपंथी की बनाई थी, जो लगातार तीन बार चुनाव दर चुनाव अपनी विजय का परचम लहराता रहा। 

पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी घोषित किए जाने को लेकर हुए विरोध से बेपरवाह मोदी ने आम चुनाव के लिए चतुराई से एक ऐसा अथक ओैर हाई टैक प्रचार अभियान चलाया जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। इस अभियान के तहत उन्होंने देशभर में 450 से ज्यादा रैलियों को संबोधित किया।
गुजरात के मेहसाणा के ऐतिहासिक वादनगर शहर में पिछड़े ‘मोध घांची’(तेली) समुदाय में जन्मे मोदी का उभार एक असाधारण घटना है। हालांकि उनके बहुत से विरोधी उनके पिछडे समुदाय से संबद्ध होने की बात को भी नहीं मानते।
संघ के प्रचारक औेर 1985 में भाजपा में काम करने के लिए भेजे गए मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर अक्तूबर 2001 में काबिज हुए। हालांकि, उससे पहले तक पार्टी के ऐसे पदाधिकारी थे जो पर्दे के पीछे काम करते थे।
उनके मुख्यमंत्री का पद संभालने के सिर्फ पांच महीने बाद 2002 में गुजरात दंगों की चपेट में आ गया। इस घटना में उनकी छवि एक विवादास्पद नेता की बनी।
गुजरात में हुए फर्जी मुठभेड़ के मुद्दे भी मीडिया में आते रहे। इस मामले में भी मोदी पर लगातार आरोप लगते रहे हैं। उनके निकट सहयोगी अमित शाह ने तो हाल तक इन आरोपों का सामना किया।
इन विकट स्थिति में मोदी ने प्रतिकूलताओं से भरा काम कर दिया। उन्होंने गुजरात में कुछ ऐसी विकास योजनाओं को अंजाम दिया, जिनके चलते उन्हें 2007 और 2012 में अपार जनसमर्थन मिला।
मोदी का दावा है कि उन्होंने अपनी पहचान को नए सिरे से तलाशने की प्रक्रिया में विकास के मुद्दे को समूची राजनीति के केंद्र में ला दिया है।
मोदी गुजरात के विकास मॉडल का खूब ढिंढोरा पीटते रहे हैं। साथ ही अपनी सरकार की उद्योगों के अनुकूल नीति का भी प्रचार कर रहे हैं, हालांकि इसके भी कुछ आलोचक हैं। लेकिन ऐसे लोग बहुमत में हैं जो मोदी को प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं। वह सपना अब पूरा होने जा रहा है।

 


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