टूजी पर कांग्रेस के बोल, जनता सुन रही है
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टूजी पर कांग्रेस के बोल, जनता सुन रही है
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टूजी पर कांग्रेस के बोल, जनता सुन रही है
एक बार फिर कांग्रेस अपनी आदत से लाचार नजर आई। टूजी मामले पर विशेष अदालत का फैसला आया तो उसके नेता लंबी-लंबी बात करने लगे हैं। वहीं देश की जनता अभी उन्हें सुन रही है।
नई दिल्ली | एक बार फिर कांग्रेस अपनी आदत से लाचार नजर आई। टूजी मामले पर विशेष अदालत का फैसला आया तो उसके नेता लंबी-लंबी बात करने लगे हैं। वहीं देश की जनता अभी उन्हें सुन रही है।
टूजी मामले पर कोर्ट के फैसले से कांग्रेस खुश है। वह यह मान रही है कि संप्रग-दो के कार्यकाल में कोई घोटाला नहीं हुआ। पार्टी के नेताओं के व्यवाहार से यही बात उभर कर आ रही है। वे सचमुच पवित्र हैं?

दरअसल, टूजी घोटाले में दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा और कनिमोड़ी समेत सभी 17 लोगों को बरी कर दिया। 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के मामले के 17 आरोपियों में 14 व्यक्ति और तीन कंपनियां (रिलायंस टेलिकॉम, स्वान टेलिकॉम, यूनिटेक) शामिल थीं।

खैर, मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि मैं सात सालों तक इंतज़ार करता रहा, काम के हर दिन, गर्मियों की छुट्टियों में भी, मैं हर दिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक इस अदालत में बैठकर इंतज़ार करता रहा कि कोई कानूनी रूप से स्वीकार्य सबूत लेकर आए। लेकिन कोई भी नहीं आया।" कोर्ट की इस बात से मामले को लेकर बरती गई संजीदगी का कोई भी अनुमान लगा सकता है।

ध्यान रहे कि यह मामला 2010 में तब सामने आया था, जब भारत के महालेखाकार और नियंत्रक (कैग) ने अपनी एक रिपोर्ट में साल 2008 में किए गए स्पेक्ट्रम आवंटन पर सवाल खड़े किए थे।कैग के अनुसार उस मामले में सरकारी खजाने को अनुमानित एक लाख 76 हजार करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था।

यह बात कही गई थी कि अगर लाइसेंस नीलामी के आधार पर दिए जाते तो खजाने को कम से कम एक लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए और हासिल हो सकते थे। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। उस वक्त कोर्ट ने मामले को सुनते हुए सौ से अधिक स्पेट्रम आवंटन को रद्द कर दिया था।

बहरहाल, कोर्ट की सुनवाई के दौरान कहा गया है कि कई अधिकारियों ने फाइलों पर इतनी ख़राब लिखावट में नोट्स लिखे कि उन्हें पढ़ा और समझा नहीं जा सकता था। कई बार तो ये नोटिंग्स कूटभाषा में या फिर बेहद लंबे और तकनीकी भाषा में लिखे गए। जिन्हें कोई आसानी से समझ नहीं सके और आला अधिकारी अपनी सुविधानुसार इसमें खामी खोज सकें।

फैसले में कहा गया है कि ए राजा ने जो किया या फिर नहीं किया, उसका इस केस की बुनियाद से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे ये पता चलता हो कि ए राजा ने कोई साजिश की थी।

अदालत के अनुसार मुझे ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि अभियोजन पक्ष किसी भी अभियुक्त के खिलाफ कोई भी आरोप साबित करने में बुरी तरह से नाकाम रहा है। सभी अभियुक्तों को बरी किया जाता है।

एक बात साफ है कि कोर्ट ने यह नहीं कहा है कि वे लोग निर्दोष हैं। कोर्ट ने कहा है कि अभियुक्त के खिलाफ अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में विफल रहा है।

कोर्ट के इस फैसले पर कांग्रेस खुश है। वह यह मान रही है कि संप्रग-दो के कार्यकाल में कोई घोटाला नहीं हुआ। पार्टी के नेताओं के व्यवाहार से यही बात उभर कर आ रही है।

क्या आरोपी नेताओं को बेवजह जेल भेज दिया गया? यदि ऐसा हुआ तो वह मनमोहन सरकार की कम बड़ी विफलता नहीं है। फिलहाल कांग्रेस के नेता 2जी पर जो कुछ बोल रहे हैं, उसे देश की जनता सुन रही है। वह पंचायत समय पर हिसाब करती है। उस समय का इंतजार होना चाहिए।


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