आम आदमी के सपनों का उत्तराखंड
उत्तराखंड, हिमालय, टाउनशिप, पर्यावरण, देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंहनगर
आम आदमी के सपनों का उत्तराखंड
   बुधवार | दिसंबर १३, २०१७ तक के समाचार
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आम आदमी के सपनों का उत्तराखंड
चीन और नेपाल की सीमा होने के कारण उत्तराखंड के बाकी जिलों का मानव विहीन होना देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो रहा है।
नयी दिल्ली | चीन और नेपाल की सीमा होने के कारण उत्तराखंड के बाकी जिलों का मानव विहीन होना देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो रहा है।
हिमालय बसेगा तभी बचेगा उत्तराखंड, नहीं तो गंगा, यमुना भी इतिहास हो जायेंगी। हिमालयी राज्य उत्तराखंड में पर्यटन, कृषि, फलोत्पादन, जड़ी-बूटी, फूलोत्पदन, प्राकृतिक खेल, दुग्ध उत्पादन, भेड़ पालन, मधु-मक्खी पालन आदि की अपार सम्भावनाएं हैं जिनसे प्लायन रोकने, रोजगार देने की अपार सम्भावनाएं होने के बावजूद पहाड़ के पहाड़ खाली होते जा रहे हैं।

उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य है जिसकी भोगोलिक संरचना भी कई रूपों में बंटी है कहीं पहाड़ी छेत्र तो कहीं मैदानी छेत्र है। इसमें 67 प्रतिशत भूमि बन छेत्र में है। अलग राज्य बनने के बाद से अब तक प्रदेशवासियों को मूलभूत सुविधाओं से ही नहीं जोड़ा गया है फिर विकास और रोजगार की बात करनी ही बेमानी है।

प्रदेश उत्तराखंड के कुल 13 जिलों में से 3 जिलों देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंहनगर में ही सिमट कर रह गया है। इन तीनो मैदानी जिलों में ब्यवस्थाएं अब्यवस्थित होती जा रही हैं और बाकी 10 जिले वीरान होते जा रहे हैं।
उत्तराखंड में चीन और नेपाल की सीमा होने के कारण बाकी जिलों का मानव विहीन होना उत्तराखंड ही नहीं देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो रहा है।

हिमालय बसेगा तभी बचेगा उत्तराखंड, नहीं तो गंगा, यमुना भी इतिहास हो जायेंगी। हिमालयी राज्य उत्तराखंड में पर्यटन, कृषि, फलोत्पादन, जड़ी-बूटी, फूलोत्पदन, प्राकृतिक खेल, दुग्ध उत्पादन, भेड़ पालन, मधु-मक्खी पालन आदि की अपार सम्भावनाएं हैं जिनसे प्लायन रोकने, रोजगार देने की अपार सम्भावनाएं होने के बावजूद पहाड़ के पहाड़ खाली होते जा रहे हैं। कहीं ना कहीं सरकार ठोस रणनीति बनाने में असफल है या यूँ कहें सरकार में बैठे लोगों में सोच का कहीं ना कहीं घोर आभाव है।

उत्तराखंड को प्लायन मुक्त बनाने और हिमालय को बचाने के लिए योजना कारगर और दूरगामी होनी चाहिए। जैसा मेरा मानना है मैं एक ऐसा उत्तराखंड चाहता हूँ जहाँ मूलभूत सुविधाओं की कहीं कोई कमी न हो और जब मूलभूत सुविधाएँ होंगी तभी रोजगार की अपार संभावनाओं का लाभ उत्तराखंड की आम जनता उठा सकती है।

उत्तराखंड में कुल 670 न्याय पंचायतें हैं और प्रत्येक न्याय पंचायत के अंदर 15 से 20 ग्राम पंचायतें आती हैं। हमे प्रत्येक न्याय पंचायत में एक ऐसी टाउनशिप बनानी है जिसमे एक ही परिसर में स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, तकनिकी शिक्षा, कृषि शिक्षा, योग शिक्षा, संस्कृति शिक्षा, खेल शिक्षा, खेल मैदान, खेल परिसर, आधुनिक सुविधा यूक्त चिकित्सालय, बैंक, ऐ.टी.एम., कर्मचारी आवास, छात्र/छात्रा आवास, आई.टी. उद्योग, ओद्योगिक संस्थान, स्थानीय उत्पादन बिक्री केंद्र, पर्यटन हटनुमा होटल, फ्लोरिक्ल्चर, हार्टिकल्चर, एग्रीकल्चर, दुग्ध डेरी, मधु-पालन, शब्जी उत्पादन, जड़ी-बूटी उत्पादन, फलोत्पादन, काष्ठ-कला, भेड़ पालन, साहसिक एवं प्राकृतिक खेल, योग-ध्यान केंद्र के साथ ही अच्छी गुणवता की सड़कें एवं परिवहन ब्यवस्था आदि एक ही परिसर में बनाई जायेंगी।

असफल सरकार और असफल लोकसेवक ही सरकारी संस्थानों को पी.पी.पी.(सार्वजनिक निजी भागीदारी) मोड पर दिए जाने की बात कर सकते हैं। पी.पी.पी. मोड कर्मचारियों और जनता को ठेकेदारों के हाथों में सोंपने के लिए रची जाने वाली साजिश है जिसका पुरजोर विरोध किया जाना चाहिए। न्याय पंचायतों में टाउनशिप बनने से एक ही परिसर में सबकुछ मिलेगा जिससे प्लायन रुकेगा, शिक्षक, डाक्टर और अन्य कर्मचारी मूलभूत सुविधाएँ पाकर तनावमुक्त होंगे और उत्तराखंड की आम जनता को अपनी श्रेष्ठ सेवा देंगे।

जब प्रत्येक न्याय पंचायत में मूलभूत सुविधाएँ होंगी तो प्लायन तो रुकेगा ही साथ ही साथ रोजगार के असीमित अवसर होंगे जिससे उत्तराखंड से बाहर रह रहे उत्तराखंड वासियों को भी वापस आने और रोजगार प्राप्त करने के अवसर प्राप्त होंगे।

टाउनशिप बनने के बाद एक ओर जहाँ मैदानी कृषि भूमि कंक्रीट के जंगल में तब्दील होने से बचेगी वहीँ ग्रामीण और पहाड़ी कृषि भूमि हरी-भरी होगी और खाद्यान उत्पादन बढ़ेगा। जिससे उत्तराखंड में खाद्यान का संकट दूर होगा।

हिमालयी राज्य उत्तराखंड में अक्सर प्राकृतिक आपदा का सामना करना पड़ता है टाउनशिप बनने के बाद जगह-जगह फलदार और छायादार वृक्ष लगेंगे जिससे भू-स्खलन नहीं होगा और आपदा का खतरा दूर होगा।
उत्तराखंड में अन्तराष्ट्रीय सीमा होने के कारण घुसपैठ, माओवाद आदि का खतरा बना रहता है टाउनशिप बनने के बाद चीन और नेपाल की सीमा पर चौकसी रखने में आसानी होगी।

न्याय पंचायतों में टाउनशिप बनने के बाद सीमा में तैनात सैनिकों को अपने परिवारों को शिक्षा और चिकित्सा सुविधा देने के लिए गाँव नहीं छोड़ने पड़ेंगे और वो अच्छी शिक्षा, चिकित्सा सुविधा के साथ अपने खेत-खलियानों को हरा-भरा रख पायेंगे।

मैदानी शहरों देहरादून, हरिद्वार, उधमसिंहनगर, हल्द्वानी में जनसँख्या का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है जिसके साथ-साथ माफिया राज अत्यधिक बढ़ रहा है जिसे पुलिस प्रशासन अंकुश लगाने में नाकाम हो रहा है। न्याय पंचायतों में टाउनशिप बनने से इन शहरों में जनसंख्या दबाव कम होगा और कानून ब्यवस्था बनाने में आसानी होगी। टाउनशिप बनने के बाद ये शहर और यहाँ के निवासियों को सही जीवन-यापन करने को मिलेगा और माफिया राज से मुक्ति मिलेगी।

हिमालय छेत्र में ग्लेशियर तभी बचे रह सकते हैं जब हिमालय छेत्र के लोग यहाँ बसेंगे। टाउनशिप बनेगी तो बसागत होने में परेशानी नहीं होगी और वही बसागत हिमालय के ग्लेशियरों, यहाँ की गंगा-यमुना नदियों और यहाँ की संस्कृति को बचायेंगी। यही बसागत देश की सीमा में घुसने वाले अवांछित तत्वों को घुसने से रोकेंगे। कुल मिलाकर पहाड़ हो या मैदान प्रत्येक न्याय पंचायत में टाउनशिप बनने के बाद उत्तराखंड का चौमुखी और दूरगामी विकास होगा और हर तरफ खुशहाली और सम्पनता होगी।

अब सवाल उठता है 670 न्याय पंचायतों में टाउनशिप बनवानेहेतु धन कहाँ से आयेगा?


ये प्रश्न जब कई लोगों ने उठाया तो मैं भी कुछ छण के लिए सोच में पढ कर सोचने लगा जब विकल्पों की तरफ ध्यान गया तो कई विकल्प मेरे सामने आये जो उत्तराखंड में टाउनशिप बनाने के लिए प्रयाप्त धन के श्रोत साबित होंगे:-

  1. उत्तराखंड का 67 प्रतिशत भू-भाग बन छेत्र में आता है ये बन भारत के साथ-साथ विश्व का पर्यावरण संतुलन बनाने हेतु कार्बन अवशोषण का कार्य करते हैं जिसके लिए विश्व के विकसित देश भारत को ग्रीन बोनस देते हैं उत्तराखंड ग्रीन बोनस राशि का हक़दार है। केंद्र सरकार उत्तराखंड को ग्रीन बोनस के रूप में धनराशि देगी वो धनराशि न्याय पंचायतों में टाउनशिप बनाने में लगाई जाएगी।
  2. उत्तराखंड एक पर्यटन और धार्मिक स्थानों का राज्य है जहाँ हर साल करोड़ों यात्री देश-विदेश से उत्तराखंड घुमने या यात्रा करने आते हैं उत्तराखंड में ऐसे लोगों से पर्यावरण एवं ब्यवस्था शुल्क लिया जायेगा उससे जो धन राशि एकत्रित होगी वो धनराशि टाउनशिप बनाने में खर्च की जाएगी।
  3. उत्तराखंड में अनेको प्रकार के उद्योग स्थापित है ऐसे उद्योगों को हर साल अपनी आय का दो प्रतिशत धन जनसेवा हेतु व्यय करना होता है। उत्तराखंड में ऐसे उद्योगों से वो दो प्रतिशत धनराशि सीधे ली जाएगी और वो धनराशि टाउनशिप बनाने में खर्च की जाएगी
  4. उत्तराखंड सीमांत प्रदेश है ओर केंद्र को अपनी अन्तराष्ट्रीय सीमा के अन्दर आने वाले प्रदेश उत्तराखंड में मूलभूत सुविधाए देने हेतु वित्तीय सहायता करनी होगी वो वित्तीय सहायता टाउनशिप बनाने में खर्च की जाएगी।
  5. उत्तराखंड में भारी रूप से कर चोरी की जाती है. ऐसे कारचोरों पर लगाम लगाई जाएगी और उन से प्राप्त धनराशि को टाउनशिप बनाने में खर्च की जाएगी।
  6. केंद्र से अनेकों परियोजनाओं में मिलने वाले धन को विधिवत रूप से टाउनशिप बनाने में व्यय किया जाएगा।
  7. लोकसेवकों, विधायक, मंत्रियों एवम् वी.आई.पी/वी.वी.आई.पी. के खर्चों में भारी कटौती कर वो धनराशि टाउनशिप बनाने में खर्च की जाएगी।

विकल्प काफी हैं जो हमें उत्तराखंड को नयी ऊँचाई पर ले जाने के लिए मौजूद हैं। जरूरत है इमानदारी से क्रियान्वयन करने की तभी हम इस ओर सफल हो पाएँगे।

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