शनिवार | अगस्त १८, २०१८ तक के समाचार
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जमाने के साथ बदलती दिल्ली
जमीन के नीचे दौड़ती मेट्रो रेल और सड़क पर चलती डीटीसी की लाल बसों ने इस शहर को नई संस्कृति दी है। एक बार फिर से वे स्थान आबाद हो गए हैं, जो पसरती दिल्ली में लगभग उपेक्षित हो गए थे।
दिल्ली का जादू चलता है: प्रियंका सिंह
जमाने को अलग नजरिए से देखने वाली प्रियंका कहती हैं कि दिल्ली में वो जादू है जो सभी को अपनी तरफ खींच लेता है। हालांकि, यह शहर महिलाओं के लिए पूरी तरह महफूज नहीं है। फिर कुछ बात है यहां।
दिल्ली थोड़ी ब्रुटल लगी: शुभ्रास्था
यहां जो दर्ज है, उसमें सुना-सुनाया कुछ भी नहीं है। न किस्सा है, न किस्सागोई। इस बातचीत में शुभ्रास्था ने वही का है जैसा उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान दिल्ली को देखा-समझा है। पढ़ें पूरी बातचीत।
स्मृति में सर्द दिल्ली का एक पूरा दिन
छोटी-छोटी तीन ऐसी घटनाएं आज हुईं जो मन में कहीं गहरे बैठ गई हैं। सोचती हूं- किस कोने में रखूं, इसे। जब जगह नहीं मिली, तब साझा कर रही हूं।
बर्ले की याद कैनबरा से लखनऊ तक
कैनबरा रहने के लिए दुनिया में सबसे अच्छी जगह मानी गई है। अब संयोग देखिए कि जिस अमेरिकी वास्तुकार ने कैनबरा शहर की परिकल्पना को आकार दिया था, उनकी कब्र लखनऊ में है।
मुड़कर जो देखती हूं
जिस छोटे शहरों से लोग सपने लेकर दिल्ली आ रहे हैं, वहां हर चीज फीकी पड़ती जा रही है। टूटती जा रही है। खत्म हो रही है। ऐसे में उनके लिए लौटना मुश्किल हो गया है।
बिजनसमेन के नाम फोटो क्यों नहीं छपे
अभिनेत्री श्वेता प्रसाद की तरह उन बिजनसमेन के नाम और फोटो नहीं छापे गए, जो इस अपराध में लिप्त हैं? ये वाजिब सवाल उठ रहे हैं।
गीता को कैसे पढ़ें?
गीता का विचार करते समय हम उस सत्य को ढूंढ़ते हैं, जो सनातन है। जिससे अन्य सभी सत्य पैदा होते हैं।
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यहां जो दर्ज है, उसमें सुना-सुनाया कुछ भी नहीं है। न किस्सा है, न किस्सागोई। इस बातचीत में शुभ्रास्था ने वही का है जैसा उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान दिल्ली को देखा-समझा है। पढ़ें पूरी बातचीत।
जमाने के साथ बदलती दिल्ली
जमीन के नीचे दौड़ती मेट्रो रेल और सड़क पर चलती डीटीसी की लाल बसों ने इस शहर को नई संस्कृति दी है। एक बार फिर से वे स्थान आबाद हो गए हैं, जो पसरती दिल्ली में लगभग उपेक्षित हो गए थे।
बिजनसमेन के नाम फोटो क्यों नहीं छपे
अभिनेत्री श्वेता प्रसाद की तरह उन बिजनसमेन के नाम और फोटो नहीं छापे गए, जो इस अपराध में लिप्त हैं? ये वाजिब सवाल उठ रहे हैं।
मुड़कर जो देखती हूं
जिस छोटे शहरों से लोग सपने लेकर दिल्ली आ रहे हैं, वहां हर चीज फीकी पड़ती जा रही है। टूटती जा रही है। खत्म हो रही है। ऐसे में उनके लिए लौटना मुश्किल हो गया है।
गीता को कैसे पढ़ें?
गीता का विचार करते समय हम उस सत्य को ढूंढ़ते हैं, जो सनातन है। जिससे अन्य सभी सत्य पैदा होते हैं।
दिल्ली का जादू चलता है: प्रियंका सिंह
जमाने को अलग नजरिए से देखने वाली प्रियंका कहती हैं कि दिल्ली में वो जादू है जो सभी को अपनी तरफ खींच लेता है। हालांकि, यह शहर महिलाओं के लिए पूरी तरह महफूज नहीं है। फिर कुछ बात है यहां।
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