रविवार | दिसंबर १७, २०१७ तक के समाचार
प्रमुख खबर
20 दिसंबर 2012 को गुजरात ने इतिहास लिखा
ठीक पांच साल पूरा होने में दो दिन बाकी है, लेकिन विधानसभा चुनाव की गिनती शुरू होने वाली है। पांच साल पहले 20 दिसंबर को सुबह-सबरे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था- ‘पीछे मुड़ कर देखने की जरूरत नहीं, आगे देखें। हमें अनंत उर्जा, हिम्मत और धैर्य चाहिए।’ आज परिणाम सामने हैं।
हारा मन फुदकन में खोजे चेतन
गुजरात चुनाव एक उम्मीद थी कि परिणाम कुछ भी हो, केंद्र में विपक्ष मजबूत होकर उभरेगा। लेकिन ऐसा लग रहा है कि परिणाम से वे लोग निराश ही होंगे, जो मजबूत और आदर्श विपक्ष को जरूरी मानते हैं।
नवीनतम
आप की पोल खोलती शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट
दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने आम आदमी पार्टी का दफ्तर बनाने के लिए जिस रास्ते को चुना है, वह अवैध है। ध्यान रहे कि यह पार्टी राजनीति में आदर्श स्थिति लौटाने का नगाड़ा पीटती रही है।
बड़ी ख़बरें
द पत्रिका विशेष
गंगा बचेगी तो हम बचेंगे
गंगा नदी की समस्याएं अनगिनत हैं। लेकिन, उन सभी के मूल में मनुष्य है, जिसका उद्धार करने के लिए वह पृथ्वी पर अवतरित हुई थी।
सत्ता के गलियारों में खो गया सम्पूर्ण क्रांति का सपना
बदली परिस्थितियों में जयप्रकाश नारायण और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं। आज समग्र क्रांति की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस होने लगी है। जिन मुद्दों पर जे.पी. आंदोलन खड़ा था, वे आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।
कई एनजीओ सरकार के भोंपू हैं: कैलाश सत्यार्थी
2014 का नोबेल शांति पुरस्कार बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को संयुक्त रूप से दिया गया है।
राजनीतिक दल अपनी साख खो बैठे हैं: गोविंदाचार्य
के.एन. गोविंदाचार्य मानते हैं कि राजनीति पैसे से सत्ता और फिर सत्ता से पैसा बनाने का खेल नहीं है। यहां पढें उनसे हुई बातचीत के अंश।
जंक्सन
मन में अनुपम
दिल्ली के निगमबोध घाट पर अनुपन मिश्र को विदा कर लोग-बाग लौटे तो वे खाली न थे। मन भारी था। अनुपम मिश्र की स्मृति उभर आई थी।
जयललिता से अम्मा बनने की कहनी
पांच तारीख की रात 11.30 बजे तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की मृत्यु की खबर आई तो हर तरफ शोक की लहर दौड़ गई। वो तमिलनाडु की जनता के लिए महज मुख्यमंत्री नहीं थीं, बल्कि उनकी अम्मा भी थी। यहां पढ़ें उनके अम्मा बनने तक की कहानी।
फीचर
उस हमले का दर्द अब भी है
आकाश साफ था। दिल्ली की गुनगुनी धूप में लोग इंडिया गेट पर हर दिन की तरह इकट्ठा थे। वहीं संसद में शीतकालीन सत्र चल रहा था। 11.02 बजे लोकसभा स्थगित हो गई थी। तभी एक सफेद एम्बैसडर कार उपराष्ट्रपति कृष्ण कांत की कार से आकर टकराई। फिर अंधाधुंध फारयरिंग शुरू हो गई।
पहल
आइस बकेट का भारतीय जवाब राइस बकेट
चावल पका हो या कच्चा यह भी कोई मायने नहीं रखता है। आप पुलाव बिरयानी कुछ भी दे सकते हैं।
खेल-खिलाड़ी
वह न भूलने वाली टेस्ट पारी
बात 1987 की है। भारत पाकिस्तान सिरीज़ में जब पहले चार टेस्ट ड्रा हो गए और पांचवें और अंतिम टेस्ट में इमरान ख़ान अपने प्रिय अब्दुल क़ादिर को खिलाने पर अड़े हुए थे, मियांदाद और इमरान के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
फोरम
शहीदों का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा तो वहां पहले ही खामोशी फैल चुकी थी। सतारा से 100 किलोमीटर दूर जाशी ऐसा ही गांव है। गांव में अजीब सी खामोशी फैली हुई है। शहीद चंद्रकांत इसी गांव से थे। झारखंड के मिराल गांव में भी यही स्थिति है। देश के ऐसे कई गांव हैं, जहां के वीर सपूतों ने शहादत दी है। ‘द पत्रिका’ परिवार की ओर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि
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